Friday, November 30, 2018

2017 में भारत में 1.2 लाख बच्चे एचआईवी से पीड़ित, दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा

भारत में 2017 में एचआईवी पॉजिटिव बच्चों (0-19 साल तक के किशोर शामिल) की संख्या एक लाख 20 हजार थी। यह आंकड़ा दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है। यूनीसेफ की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर एड्स फैलने से रोकने के प्रयासों में तेजी नहीं लाई गई तो 2030 दुनिया में रोजाना 80 किशोरों की मौत होगी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दक्षिण एशिया ने बच्चों, किशोरों, गर्भवती महिलाओं और मांओं में एड्स की रोकथाम के लिए काफी कोशिश की है।

एड्स पीड़ित बच्चों में दूसरे नंबर पर पाक
यूनीसेफ ने गुरुवार को 'चिल्ड्रन, एचआईवी एंड एड्स: द वर्ल्ड इन 2030' रिपोर्ट जारी की। इसके मुताबिक- पिछले साल पाकिस्तान में 5800, नेपाल में 1600 बच्चे एड्स का शिकार पाए गए। वहीं बांग्लादेश एक हजार से कम बच्चे एचआईवी पीड़ित थे।

रिपोर्ट में बताया गया- एक अनुमान के मुताबिक 2017 में 5 साल से कम उम्र के एचआईवी पीड़ित बच्चों के इलाज की संख्या 2010 की तुलना में 43% कम थी। दुनियाभर में एचआईवी पीड़ितों के इलाज में 35% की गिरावट देखी गई।

एड्स की रोकथाम की पर्याप्त कोशिशें जरूरी
रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि अगर एड्स फैलने से रोकने वाले प्रयासों में तेजी नहीं लाई गई तो 2030 तक रोज 80 किशोरों की मौत इस बीमारी से होगी। मौजूदा ट्रेंड बताता है कि एड्स के चलते होने वाली मौतों की संख्या कम है लेकिन इसे कम करने के लिए पर्याप्त कोशिशें नहीं हो रहीं।

एक अनुमान के मुताबिक- 14 साल तक के एचआईवी पीड़ित बच्चों की एंटी-रेट्रोवाइरल थैरेपी (एआरटी) 2017 में 73% देखी गई। 2010 की तुलना में इसमें 50% का इजाफा हुआ।

मौजूदा डेटा के मुताबिक- बीते 8 साल में मां से बच्चे में फैलने वाले संक्रमण में 40% की गिरावट आई है। वहीं, दो तिहाई किशोर लड़कियों में इंफेक्शन देखा गया।

30 लाख लोग पीड़ित
फिलहाल दुनियाभर में 19 साल और उससे कम उम्र के 30 लाख लोग एचआईवी से पीड़ित हैं। 2030 तक दो लाख नए लोग इसमें जुड़ सकते हैं। 2030 तक दुनिया में 14 लाख एचआईवी संक्रमित बच्चों की संख्या में कमी का लक्ष्य तय किया गया है।

Thursday, November 8, 2018

日本不同寻常的世界观

我不情愿地把手从慢慢旋转的陶碗上收回,看着它凹凸不平的一面慢慢停下来,心想要是能再把它们拉直一点就好了。我当时在日本山口县(Yamaguchi)的乡村萩市(Hagi),这是一个古老的陶镇,虽然我信任这个说服我顺其自然的陶工,但我无法理解他的动机。

他微笑着说:“它有侘寂之美”——并迅速将这只碗拿走,准备烧制。我坐在那里,思考着这只碗对称性的缺失,想知道他到底是什么意思。

事实证明,不理解这个短语很正常。作为日本美学的一个关键部分——仍支配着日本人的品味与审美规范的古老理念——“侘寂”不仅难以翻译,而且在日本文化中也被认为是无法定义的。人们经常在深入的鉴赏时喃喃自语,当被要求详细说明时,后面总是跟着“无理!”(muri,意为“不可能”)这个词,这个短语给出了一种不同寻常的世界观。

走进“技术圣殿”——颠覆你的想象
莎士比亚的地理谬误及其世界观
警戒!你的老板可能是自恋狂
便当相伴 日本特色的奇幻铁路之旅

“侘寂”起源于中国宋代(960-1279)的道教,后来传入佛教禅宗(Zen Buddhism)。最初,“侘寂”被视为一种简朴、克制的欣赏方式。今天,它代表了一种以较轻松的态度看待短暂、自然和忧郁,喜爱世间万物的不完美和缺陷,从建筑到陶器再到插花均是如此。

“侘”(wabi)大致意思是“简陋朴素的优雅之美”,而“寂”(sabi)意思是“时间易逝和万物无常”,两者结合在一起,形成了一种日本独有的、对日本文化至关重要的哲理。但是,正如佛教僧侣相信的,语言是理解的敌人,这种描述只能触及这一话题的表面。

东京大学美学研究所的小田部胤久(Tanehisa Otabe)教授认为,“侘茶”(wabi-cha)这门古老的艺术——15世纪末至16世纪由茶艺大师村田珠光(Murata Juko)和千利休(Sen no Rikyu)创立的一种茶道形式——是“侘寂”精神最好的体现。两位茶道大师选择了普通的日本陶器而不是当时盛行的(技术上也完美的)进口中国陶器,挑战了当时的审美原则。不再以鲜艳的色彩和华丽的设计为美的标志,大师鼓励茶客品茶时细细欣赏若在以前会被忽视的微妙颜色和纹理。